सम्पूर्ण आरती संग्रह
सनातन धर्म के 22 प्रमुख देवी-देवताओं की प्रामाणिक आरतियाँ, शुद्ध लिरिक्स, सरल हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आरती फल।
श्री गणेश जी की आरती
Shree Ganesh Aarti
विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता एवं रिद्धि-सिद्धि के दाता भगवान श्री गणेश जी की सर्वकल्याणकारी आरती।
भगवान शिव जी की आरती
Lord Shiva Aarti
सृष्टि, स्थिति एवं संहार के अधिपति, पंचाक्षरी मन्त्र स्वरूप देवाधिदेव महादेव शिव की पावन आरती।
श्री हनुमान जी की आरती
Shree Hanuman Aarti
रामभक्त शिरोमणि, पवनपुत्र, संकटमोचन श्री हनुमान जी की सबसे प्रसिद्ध एवं चमत्कारी आरती।
माँ दुर्गा जी की आरती
Maa Durga Aarti
आदिशक्ति, महिषासुरमर्दिनी, भवानी माता दुर्गा जी की सर्वप्रिय एवं अत्यंत पावन आरती।
माँ लक्ष्मी जी की आरती
Maa Lakshmi Aarti
धन, ऐश्वर्य, सौभाग्य एवं सुख-शांति की अधिष्ठात्री देवी माँ महालक्ष्मी जी की मंगलकारी आरती।
माँ सरस्वती जी की आरती
Maa Saraswati Aarti
विद्या, बुद्धि, वाणी, संगीत एवं समस्त ललित कलाओं की अधिष्ठात्री माँ सरस्वती जी की पावन आरती।
प्रभु श्री राम चन्द्र जी की आरती
Lord Rama Aarti
मर्यादा पुरुषोत्तम, धर्म-धुरंधर, कौशल्यानंदन प्रभु श्री रामचन्द्र जी की पावन आरती।
भगवान श्री कृष्ण जी की आरती
Lord Krishna Aarti
मुरलीधर, गिरिधर गोपाल, राधा-माधव भगवान श्री कृष्ण जी की अत्यंत मनोहारी एवं रसमयी आरती।
भगवान श्री विष्णु जी की आरती
Lord Vishnu Aarti
समस्त संसार की सबसे प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय सार्वभौमिक आरती 'ॐ जय जगदीश हरे'।
भगवान सूर्य देव जी की आरती
Lord Surya Aarti
जगत के प्रत्यक्ष देवता, नवग्रहों के राजा, अंधकार नाशक भगवान सूर्य नारायण की पावन आरती।
श्री शनि देव जी की आरती
Shree Shani Dev Aarti
कर्मफल प्रदाता, दण्डनायक, सूर्यपुत्र श्री शनि देव जी की शांति एवं कृपा प्रदायिनी आरती।
माँ गायत्री जी की आरती
Maa Gayatri Aarti
वेदों की जननी, ब्रह्मविद्या स्वरूपा, समस्त सद्बुद्धि प्रदायिनी माँ गायत्री जी की पावन आरती।
श्री बृहस्पति देव जी की आरती
Brihaspati Dev Aarti
देवताओं के गुरु, ज्ञान, विद्या, धर्म एवं सौभाग्य के स्वामी श्री बृहस्पति देव जी की मंगल आरती।
माँ तुलसी जी की आरती
Maa Tulsi Aarti
विष्णुप्रिया, वृंदा स्वरूपा, समस्त पाप-ताप नाशिनी माँ तुलसी जी की नित्य मंगलकारी आरती।
माँ पार्वती जी की आरती
Maa Parvati Aarti
हिमालय पुत्री, महादेव अर्द्धांगिनी, गणेश-कार्तिकेय जननी माता पार्वती जी की सुखदायिनी आरती।
माँ सीता जी की आरती
Maa Sita Aarti
त्याग, तपस्या, पातिव्रत्य एवं क्षमा की प्रतिमूर्ति माता जानकी जी की पावन आरती।
भगवान विश्वकर्मा जी की आरती
Lord Vishwakarma Aarti
समस्त सृष्टि के दिव्य वास्तुकार, शिल्पकला एवं यंत्र-शस्त्रों के जनक भगवान विश्वकर्मा जी की आरती।
श्री कुबेर जी की आरती
Shree Kuber Aarti
समस्त देवों के कोषाध्यक्ष, धन-धान्य एवं संपदा के रक्षक श्री कुबेर देव जी की पावन आरती।
श्री धन्वंतरि जी की आरती
Shree Dhanvantari Aarti
आयुर्वेद के जनक, समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए भगवान धन्वंतरि जी की आरोग्य प्रदायिनी आरती।
श्री नवग्रह देवों की आरती
Navagraha Aarti
सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु एवं केतु समस्त नवग्रहों की शांति प्रदायिनी वैदिक आरती।
माँ गंगा जी की आरती
Maa Ganga Aarti
हरिद्वार, काशी और प्रयागराज के पावन तटों पर गूंजने वाली पतित-पावनी, मोक्षदायिनी माँ गंगा जी की आरती।
श्री सत्यनारायण जी की आरती
Shree Satyanarayan Aarti
सत्य स्वरूप, कलिकाल में सर्व मनोरथ सिद्ध करने वाले भगवान श्री सत्यनारायण जी की पावन आरती।
सनातन धर्म में आरती का पावन महत्व एवं नियम
आरती संस्कृत के 'आरात्रिक' शब्द से व्युत्पन्न है, जिसका अर्थ है रात्रि या अज्ञान के अंधकार को दूर कर दिव्य प्रकाश का आह्वान करना। पूजा-अर्चना के समापन पर आरती करने से पूजा में रह गई किसी भी त्रुटि या भूल की क्षमा प्राप्त होती है और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
१. दीपक का घुमाव
आरती थाल को भगवान के चरणों में ४ बार, नाभि में २ बार, मुख पर १ बार तथा समग्र विग्रह पर ७ बार ॐ के आकार में घुमाएं।
२. आरती लेना
आरती पूर्ण होने के बाद दोनों हाथों से ज्योत की पावन ऊष्मा को मस्तक और नेत्रों पर स्पर्श कर ग्रहण करना चाहिए।
३. पुष्पांजलि एवं क्षमा
आरती के पश्चात मंत्र पुष्पांजलि अर्पित करें और 'कर्पूरगौरं करुणावतारं' अथवा 'त्वमेव माता' का उच्चारण करें।