माँ दुर्गा जी की आरती
Maa Durga Aarti • 4 पावन पद
"जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी"
आदिशक्ति, महिषासुरमर्दिनी, भवानी माता दुर्गा जी की सर्वप्रिय एवं अत्यंत पावन आरती।
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निसदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥
Jaya Ambē Gaurī, Maiyā Jaya Shyāmā Gaurī. Tumakō nisadina dhyāvata, Hari Brahmā Shivarī.. Ōṁ Jaya Ambē Gaurī..
हे जगदम्बा माँ गौरी, आपकी जय हो! श्री हरि विष्णु, ब्रह्मा जी और भगवान शिव आपका नित्य स्मरण व ध्यान करते हैं।
Victory to Divine Mother Ambe Gauri, meditated upon continuously by Vishnu, Brahma, and Shiva.
मांग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥ कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥
Māṅga sindūra virājata, ṭīkō mr̥gamada kō. Ujjvala sē dōu nainā, chandravadana nīkō.. Kanaka samāna kalēvara, raktāmbara rājai.. Ōṁ Jaya Ambē Gaurī..
माता की मांग में पावन सिंदूर और कस्तूरी का तिलक सुशोभित है। चंद्रमुख और नयन अत्यंत उज्ज्वल हैं। स्वर्ण के समान काया पर लाल वस्त्र और लाल पुष्पों की माला विराजित है।
Adorned with sacred vermilion and musk tilak, moon-faced with radiant eyes, clothed in golden crimson garments with red garlands.
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुःख हारी॥ कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥ महिषासुर घातिनी, दम्भ विदारिणी। मधु कैटभ विनाशिनी, सुर भय हारिणी॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥
Kēhari vāhana rājata, khaḍga khappara dhārī. Sura-nara-munijana sēvata, tinakē duḥkha hārī.. Mahiṣhāsura ghātinī, dambha vidāriṇī.. Ōṁ Jaya Ambē Gaurī..
सिंह की सवारी करने वाली, खड्ग और खप्पर धारिणी माता महिषासुर, मधु-कैटभ आदि दैत्यों का संहार कर देवों और भक्तों के समस्त दुखों को हरने वाली हैं।
Mounted upon a lion holding sword, vanquisher of Mahishasura, Madhu, and Kaitabha, dispelling the afflictions of gods and sages.
चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरों। बाजत ताल मृदङ्गा, और बाजत डमरू॥ तुम ही जग की माता, तुम ही हो भर्ता। भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पति कर्ता॥ भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी। मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥ श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावै॥
Chauṁsaṭha yōginī gāvata, nr̥tya karata bhairōṁ.. Tumahī jaga kī mātā, tumahī hō bhartā.. Kahat Shivānanda swāmī, sukha-sampatti pāvai..
चौंसठ योगिनियां मंगल गान करती हैं। माता ही संपूर्ण जगत की पालनहार और सुख-समृद्धि प्रदायिनी हैं। जो भक्त यह आरती गाते हैं वे अक्षय सुख-संपदा पाते हैं।
Celebrated by 64 Yoginis, the ultimate Mother and Protector of cosmos, granting boundless happiness and prosperity.
नवरात्रि, शुक्रवार अथवा दैनिक पूजा में कपूर, लौंग व घी की बाती से सप्रेम आरती करें।
समस्त प्रकार के भय, शत्रु बाधा, रोग एवं संकटों का निवारण, सौभाग्य एवं आत्मिक शक्ति की प्राप्ति।
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