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29 महा चालीसा संग्रह

सम्पूर्ण चालीसा संग्रह (Chalisa Sangrah)

श्री हनुमान, शिव, दुर्गा, गणेश, लक्ष्मी, सरस्वती, राम, कृष्ण सहित समस्त प्रमुख देवी-देवताओं की प्रामाणिक चालीसा, दोहे एवं चौपाइयाँ सरल हिंदी भावार्थ सहित।

भगवान हनुमान (बजरंगबली) 43 पद

श्री हनुमान चालीसा

Shree Hanuman Chalisa

गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित सर्वप्रिय एवं चमत्कारी स्तुति, जो समस्त भय, रोग, पीड़ा और संकटों का निवारण कर बल, बुद्धि और विद्या प्रदान करती है।

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भगवान शिव (महादेव) 47 पद

श्री शिव चालीसा

Shree Shiv Chalisa

देवाधिदेव महादेव शिव शम्भु की अलौकिक महिमा, कल्याणकारी स्वरूप और पापनाशक शक्ति का गुणगान करने वाली अनुपम स्तुति।

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माँ दुर्गा (जगदम्बा) 42 पद

श्री दुर्गा चालीसा

Shree Durga Chalisa

आदिशक्ति माँ जगदम्बा भवानी की महामहिमा और असुरनाशिनी शक्ति का भक्तिमय वर्णन, जो भक्तों को अभय और सर्वसुख प्रदान करता है।

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भगवान गणेश (विघ्नहर्ता) 44 पद

श्री गणेश चालीसा

Shree Ganesh Chalisa

प्रथम पूज्य, ऋद्धि-सिद्धि के दाता एवं विघ्नविनाशक भगवान श्री गणेश की पावन चालीसा, जिसके पाठ से प्रत्येक कार्य निर्विघ्न सम्पन्न होता है।

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माँ लक्ष्मी (महालक्ष्मी) 49 पद

श्री लक्ष्मी चालीसा

Shree Lakshmi Chalisa

धन, वैभव, ऐश्वर्य एवं सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी की मंगलमयी स्तुति, जिससे दरिद्रता दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि वास करती है।

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माँ सरस्वती (वीणावादिनी) 45 पद

श्री सरस्वती चालीसा

Shree Saraswati Chalisa

विद्या, ज्ञान, वाणी, संगीत एवं समस्त कलाओं की देवी भगवती सरस्वती की पावन स्तुति, जो विद्यार्थियों एवं साधकों को मेधा और विवेक प्रदान करती है।

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मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम 48 पद

श्री राम चालीसा

Shree Ram Chalisa

रघुकुल तिलक, धर्म के साक्षात् विग्रह प्रभु श्री रामचन्द्र जी की महिमा और उनके पावन चरित्र का भक्तिपूर्ण गायन।

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भगवान श्री कृष्ण 46 पद

श्री कृष्ण चालीसा

Shree Krishna Chalisa

आनंदकंद, गीता के उपदेशक, बाल गोपाल भगवान श्री कृष्ण की मनमोहक बाल-लीलाओं और जगत्तारक स्वरूप का वंदन।

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भगवान शनिदेव (कर्मफलदाता) 45 पद

श्री शनि चालीसा

Shree Shani Chalisa

सूर्यपुत्र, न्यायप्रिय और कर्मफलदाता भगवान शनिदेव की प्रभावशाली स्तुति, जिससे शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या एवं महादशा के कष्ट शांत होते हैं।

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भगवान सूर्यदेव (प्रत्यक्ष देव) 45 पद

श्री सूर्य चालीसा

Shree Surya Chalisa

समस्त सृष्टि के चक्षु, प्रत्यक्ष देव भगवान भुवन भास्कर सूर्यदेव की ओजस्वी चालीसा, जो आरोग्य, तेज और पद-प्रतिष्ठा प्रदान करती है।

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भगवान श्री हरि विष्णु (जगतपालक) 43 पद

श्री विष्णु चालीसा

Shree Vishnu Chalisa

सृष्टि के पालनकर्ता, शंख-चक्र-गदा-पद्मधारी भगवान नारायण की पावन चालीसा, जिसके पाठ से जीवन में संतुलन और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

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वेदमाता गायत्री 45 पद

श्री गायत्री चालीसा

Shree Gayatri Chalisa

वेदों की जननी, ब्रह्मविद्या और आत्मप्रकाश की अधिष्ठात्री वेदमाता गायत्री की दिव्य स्तुति, जो सद्बुद्धि और आत्म-साक्षात्कार कराती है।

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माँ पार्वती (गौरी/उमा) 25 पद

श्री पार्वती चालीसा

Shree Parvati Chalisa

हिमवान सुता, शिवप्रिया माँ गौरी पार्वती की भक्तिमय चालीसा, जो अखंड सौभाग्य, सुयोग्य जीवनसाथी और दांपत्य सुख का वरदान देती है।

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भगवान काल भैरव 40 पद

श्री भैरव चालीसा

Shree Bhairav Chalisa

काशी के कोतवाल, काल के भी काल भगवान भैरवनाथ की ओजस्वी चालीसा, जो हर प्रकार के भय, शत्रु और संकट से तत्काल रक्षा करती है।

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माँ बगलामुखी (पीताम्बरा) 22 पद

श्री बगलामुखी चालीसा

Shree Baglamukhi Chalisa

दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या माँ पीताम्बरा बगलामुखी की चालीसा, जो शत्रुओं की वाणी व बुद्धि का स्तंभन कर विजय प्रदान करती है।

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माँ जानकी सीता जी 46 पद

श्री सीता चालीसा

Shree Sita Chalisa

जनकनन्दिनी, पतिव्रत धर्म की साक्षात् प्रतिमा माँ सीता जी की विनम्र स्तुति, जो धैर्य, त्याग और पातिव्रत्य शक्ति का संचार करती है।

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समस्त नवग्रह देव 35 पद

श्री नवग्रह चालीसा

Shree Navagraha Chalisa

सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु एवं केतु — समस्त नवग्रहों की सम्मिलित शांति व अनुकूलता हेतु अत्यंत प्रभावशाली चालीसा।

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नाग देवता (अनंत, वासुकि, शेष) 21 पद

श्री नाग चालीसा

Shree Nag Chalisa

नाग देवताओं की पावन स्तुति, जो कालसर्प दोष, सर्प भय और पितृ दोषों के निवारण हेतु अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

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भगवान विश्वकर्मा 42 पद

श्री विश्वकर्मा चालीसा

Shree Vishwakarma Chalisa

देव शिल्पी और संपूर्ण ब्रह्मांड के परम वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा की मंगलकारी चालीसा, जो निर्माण, शिल्प, व्यापार और तकनीकी कार्यों में अद्वितीय सफलता प्रदान करती है।

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धनपति कुबेर देव 43 पद

श्री कुबेर चालीसा

Shree Kuber Chalisa

समस्त यक्षों और देवों के कोषाध्यक्ष धनपति कुबेर देव की कल्याणकारी चालीसा, जो आर्थिक तंगी दूर कर स्थायी धन-वैभव और सुख-शांति प्रदान करती है।

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भगवान धन्वंतरी (आरोग्य देव) 43 पद

श्री धन्वंतरी चालीसा

Shree Dhanvantari Chalisa

समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए आयुर्वेद के प्रवर्तक भगवान धन्वंतरी की सिद्ध चालीसा, जो संपूर्ण शारीरिक व मानसिक व्याधियों का शमन कर आरोग्य प्रदान करती है।

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माँ काली (महाकाली) 42 पद

श्री काली चालीसा

Shree Kali Chalisa

सकल असुरों, दुष्टों और घोर संकटों का विनाश करने वाली पराम्बा माँ महाकाली की शक्तिशाली चालीसा, जो साधक को अभय, बल और विजय प्रदान करती है।

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भगवान श्री गोपाल कृष्ण 42 पद

श्री गोपाल चालीसा

Shree Gopal Chalisa

ब्रज नंदन, यशोदा नंदन भगवान श्री गोपाल कृष्ण की मनोहारी एवं मधुर चालीसा, जो संतान सुख, पारिवारिक शांति, प्रेम और आनंद प्रदान करती है।

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माँ तुलसी (वृंदा देवी) 43 पद

श्री तुलसी चालीसा

Shree Tulsi Chalisa

भगवान श्री हरि विष्णु की परम प्रिया, मोक्षदायिनी एवं संपूर्ण पापों का नाश करने वाली माँ तुलसी की पावन चालीसा, जो घर में सुख, शांति और शुचिता लाती है।

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माँ संतोषी 43 पद

श्री संतोषी माता चालीसा

Shree Santoshi Mata Chalisa

भगवान गणेश की मानस पुत्री और समस्त मनोकामनाएं पूर्ण कर संतोष, सुख व शांति प्रदान करने वाली माँ संतोषी की परम कल्याणकारी चालीसा।

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सद्गुरु देव 42 पद

श्री गुरु चालीसा

Shree Guru Chalisa

अज्ञान के अंधकार का नाश कर आत्मज्ञान का मार्ग प्रशस्त करने वाले परम पूज्य सद्गुरु देव की पावन चालीसा, जो विवेक, ज्ञान और मोक्ष प्रदान करती है।

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माँ महालक्ष्मी 42 पद

श्री महालक्ष्मी चालीसा

Shree Mahalaxmi Chalisa

अष्ट लक्ष्मी स्वरूपा, श्री हरि विष्णु की परम आह्लादिनी शक्ति भगवती महालक्ष्मी की दिव्य चालीसा, जो ऐश्वर्य, वैभव, धन-धान्य और अखंड सौभाग्य प्रदान करती है।

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संकटमोचन हनुमान जी 37 पद

श्री बजरंग बाण

Shree Bajrang Baan

गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित अमोघ और अत्यंत शक्तिशाली अस्त्र स्वरूप स्तुति, जो असाध्य संकटों, घोर शत्रु बाधाओं और तंत्र बाधाओं का तत्काल शमन करती है।

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पवनपुत्र हनुमान जी 9 पद

श्री संकटमोचन हनुमानाष्टक

Shree Sankatmochan Hanumanashtak

गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा विरचित आठ पदों का अत्यंत पावन और चमत्कारी स्तोत्र, जो जीवन के घोर से घोर संकटों और दुखों का तत्काल निवारण करता है।

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