माँ गायत्री जी की आरती
Maa Gayatri Aarti • 2 पावन पद
"जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता"
वेदों की जननी, ब्रह्मविद्या स्वरूपा, समस्त सद्बुद्धि प्रदायिनी माँ गायत्री जी की पावन आरती।
जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता। सत् मारग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता॥ जयति जय गायत्री माता॥
Jayati Jaya Gāyatrī Mātā, Jayati Jaya Gāyatrī Mātā. Sat māraga para hamēṁ chalāō, jō hai sukhadātā.. Jayati Jaya Gāyatrī Mātā..
वेदमाता गायत्री की जय हो, जो हमें सदा सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।
Hail Mother Gayatri, who guides our intellect along the righteous path of truth and lasting joy.
आदि शक्ति तुम अलख निरञ्जन, जग पालन कर्त्री। दुःख दारिद्र्य विनाशिनी, सुख सम्पत्ति भर्त्री॥ ऋग्वेद यजुर्वेद साम अथर्वा, चारों वेद जननी। ऋषि मुनि ज्ञानी ध्यावत, सुर नर शिर नवनी॥ हंसवाहिनी ज्ञान-दायिनी, प्रणव ओंकार रूपा। आरती जो कोई गावे, पावे पद अनूपा॥
Ādi shakti tuma alakha nirañjana, jaga pālana kartrī.. Ṛgvēda Yajurvēda Sāma Atharvā, chārōṁ vēda jananī.. Āratī jō kōī gāvē, pāvē pada anūpā..
आप ही आद्यशक्ति, चारों वेदों की जननी और ओंकार रूपा हैं। जो भी भक्त आपकी आरती गाते हैं, वे परम ज्ञान और पद प्राप्त करते हैं।
Primordial power, origin of the four Vedas, swan-borne mother of Omkara, bestowing supreme spiritual realization.
गायत्री महामंत्र जप के पश्चात घी के दीपक से तीनों संध्याओं में आरती का विधान है।
बुद्धि की शुद्धि, आत्मज्ञान, गायत्री मंत्र सिद्धि, पापों का नाश एवं मोक्ष की प्राप्ति।
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