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🪔 भगवान श्री कृष्ण | माधव भक्ति आरती

भगवान श्री कृष्ण जी की आरती

Lord Krishna Aarti • 3 पावन पद

"आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की"

मुरलीधर, गिरिधर गोपाल, राधा-माधव भगवान श्री कृष्ण जी की अत्यंत मनोहारी एवं रसमयी आरती।

2 दर्शन | 3 पद
1 टेक / ध्रुवपद

आरती कुञ्जबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

Āratī Kuñjabihārī kī, Shrī Giridhara Kr̥ṣhṇa Murārī kī..

सरल हिंदी भावार्थ:

कुंजों में विहार करने वाले, गोवर्धन पर्वत को धारण करने वाले भगवान श्री कृष्ण मुरारी की आरती करें।

English Meaning:

Perform the Aarti of Kunjabihari, the lifter of Govardhan hill and beloved Lord Krishna.

2 पद १ (रूप माधुरी)

गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला। श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला॥ गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली। लतन में ठाढ़े बनमाली, भ्रमर सी अलक कस्तूरी तिलक। चन्द्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की॥ श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

Galē mēṁ baijantī mālā, bajāvai muralī madhura bālā.. Gagana sama aṅga kānti kālī, Rādhikā chamaka rahī ālī.. Lalita chhavi Shyāmā pyārī kī..

सरल हिंदी भावार्थ:

गले में वैजयंती माला, अधरों पर मधुर मुरली, कानों में चमकते कुंडल और मेघश्याम रूप में श्री राधा रानी के संग विराजमान हैं।

English Meaning:

Adorned with garland of wild flowers, playing the sweet flute, shining with cloud-dark hue beside Radhika.

3 पद २ (चरण वंदना व फल)

कनकमय मुकुट शीश सोहै, देखि छवि त्रिभुवन जन मोहै। चरण ते निकसी सुरसरि-धारा, मिटावै कलियुग के पातक भारा॥ सदा जे ध्यान धरत मन में, मुक्ति पावत हैं क्षण में। आरती कुञ्जबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

Kanakamaya mukuṭa shīṣha sōhai, dēkhi chhavi tribhuvana jana mōhai.. Charaṇa tē nikasī surasari-dhārā.. Āratī Kuñjabihārī kī, Shrī Giridhara Kr̥ṣhṇa Murārī kī..

सरल हिंदी भावार्थ:

जिनके स्वर्ण मुकुट की छवि तीनों लोकों को मुग्ध करती है, जिनके चरणों से पतित-पावनी गंगा निकली हैं। ऐसे प्रभु का ध्यान धरने से सहज मुक्ति मिलती है।

English Meaning:

Whose golden crown enchants all worlds, from whose holy feet Ganga flows, bestowing immediate liberation to sincere devotees.

आरती विधि एवं नियम

जन्माष्टमी अथवा संध्याकाल में तुलसीदल, माखन-मिश्री भोग के साथ प्रेमपूर्वक गायन करें।

आरती के लाभ एवं फल

हृदय में विशुद्ध भक्ति, सांसारिक चिंताओं से मुक्ति, आनंद, आकर्षण एवं भगवान के चरणों में प्रीति।