भगवान शिव जी की आरती
Lord Shiva Aarti • 4 पावन पद
"ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु हर शिव ओंकारा"
सृष्टि, स्थिति एवं संहार के अधिपति, पंचाक्षरी मन्त्र स्वरूप देवाधिदेव महादेव शिव की पावन आरती।
ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु हर शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धाङ्गी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
Ōṁ Jaya Shiva Ōṅkārā, Prabhu Hara Shiva Ōṅkārā. Brahmā, Viṣhṇu, Sadāshiva, Arddhāṅgī Dhārā.. Ōṁ Jaya Shiva Ōṅkārā..
प्रणव ओंकार स्वरूप भगवान शिव की जय हो! जो ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव रूप में संपूर्ण जगत में व्याप्त हैं और शक्ति स्वरूपा माता पार्वती को अर्द्धांगिनी रूप में धारण करते हैं।
Hail to Lord Shiva, the embodiment of Omkara, representing the holy trinity and unified with Divine Mother Shakti.
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। hंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
Ēkānana chaturānana pañchānana rājē. Hansāsana garuṛāsana vr̥ṣhavāhana sājē.. Ōṁ Jaya Shiva Ōṅkārā..
भगवान शिव एकांश रूप में सदाशिव, चतुर्मुख रूप में ब्रह्मा और पञ्चमुख रूप में महादेव सुशोभित हैं। हंस, गरुड़ और नंदी वृषभ इनके वाहन रूप में शोभायमान हैं।
He shines in single, fourfold, and fivefold divine manifestations, gracing vehicles of swan, eagle, and sacred bull Nandi.
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे। त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥ अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी। त्रिपुरारी कंसारी करमाला धारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
Dō bhuja chāra chaturbhuja dasabhuja ati sōhē. Triguṇa rūpa nirakhatē tribhuvana jana mōhē.. Akṣhamālā vanamālā muṇḍamālā dhārī. Tripurārī kaṁsārī karamālā dhārī.. Ōṁ Jaya Shiva Ōṅkārā..
दो, चार और दस भुजाओं वाले भगवान शिव के त्रिगुणातीत स्वरूप को देखकर तीनों लोकों के प्राणी मुग्ध होते हैं। वे रुद्राक्ष माला, वनमाला और मुण्डमाला धारण करने वाले त्रिपुरारी हैं।
Adorned with multi-armed cosmic glory, transcendent of three gunas, wearing sacred beads and necklaces, the destroyer of demon Tripura.
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अङ्गे। सनकादिक गरुणादिक भूतादिक सङ्गे॥ कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूल धर्ता। जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥ काशी में विश्वनाथ विराजे नन्दी ब्रह्मचारी। नित उठ दर्शन पावत महिमा अति भारी॥ त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥
Shvētāmbara pītāmbara bāghambara aṅgē. Sanakādika garuṇādika bhūtādika saṅgē.. Kara kē madhya kamaṇḍalu chakra trishūla dhartā.. Kahat Shivānanda swāmī manavāñchhita phala pāvē..
हाथों में त्रिशूल और कमंडलु धारण करने वाले, जगत के रचयिता, पोषक और संहारक महादेव की यह आरती जो भक्त गाते हैं, वे स्वामी शिवानन्द अनुसार समस्त मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं।
Creator, sustainer, and dissolver of the universe holding the trident. Whoever sings this Aarti receives all cherished blessings.
बिल्वपत्र, भस्म, चन्दन एवं कर्पूर की आरती से शिवलिंग अथवा शिव परिवार के सम्मुख गायन करें।
अकाल मृत्यु भय से मुक्ति, मानसिक शांति, सर्व पापों का शमन, गृह क्लेश निवारण एवं मोक्ष की प्राप्ति।
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