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🪔 पतित पावनी माँ गंगा | मोक्षदायिनी नदी आरती

माँ गंगा जी की आरती

Maa Ganga Aarti • 1 पावन पद

"ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता"

हरिद्वार, काशी और प्रयागराज के पावन तटों पर गूंजने वाली पतित-पावनी, मोक्षदायिनी माँ गंगा जी की आरती।

2 दर्शन | 1 पद
1 टेक व पद

ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता। जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥ चन्द्र सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल धारा। युग-युग से तरता आया, शरण तिहारी संसारा॥ शिव जटा में विराजी, भगीरथ तप कीन्हा। सगर सुतों को तारा, मोक्ष सबहिं दीन्हा॥ आरती गंगा मैया की, जो जन नित्य गावै। पाप ताप सब छूटै, परम पद पावै॥

Ōṁ Jaya Gaṅgē Mātā, Maiyā Jaya Gaṅgē Mātā. Jō nara tumakō dhyātā, manavāñchhita phala pātā.. Shiva jaṭā mēṁ virājī, Bhagīratha tapa kīnhā.. Pāpa tāpa saba chhūṭai, parama pada pāvai..

सरल हिंदी भावार्थ:

भगवान शिव की जटाओं से अवतरित, राजा भगीरथ के तप से प्रकट माँ गंगा की आरती से मनुष्य समस्त पापों से मुक्त होकर परम पद प्राप्त करता है।

English Meaning:

Descended from Shiva's locks through Bhagiratha's penance, washing away sins and granting eternal salvation.

आरती विधि एवं नियम

गंगा स्नान अथवा संध्याकाल में गंगाजल छिड़ककर दीपदान सहित आरती करें।

आरती के लाभ एवं फल

समस्त पापों का क्षालन, आत्मिक शांति, मोक्ष, पवित्रता एवं गंगाजल के समान जीवन में निर्मलता।