श्रीकृष्ण और कुब्जा
भगवान श्रीकृष्ण ने कुब्जा के साथ शारीरिक अथवा कामुक संबंध स्थापित किए थे; इसलिए उनका चरित्र कामप्रधान था।
प्रमुख शास्त्रीय स्रोतों और पारंपरिक वैष्णव व्याख्याओं के अनुसार, कुब्जा प्रसंग को भक्त और भगवान के संबंध, दिव्य अनुग्रह, मधुरा-भक्ति तथा आध्यात्मिक प्रतीकवाद के रूप में समझाया गया है। इस दृष्टिकोण में श्रीकृष्ण का उद्देश्य भक्त की भावना को स्वीकार करना और उसका आध्यात्मिक कल्याण करना है, न कि सांसारिक वासना या कामुक संबंध स्थापित करना। लेख में प्रस्तुत तर्क भागवत, भगवद्गीता, ब्रह्मवैवर्त पुराण तथा अन्य पारंपरिक स्रोतों की इसी व्याख्या पर आधारित हैं।