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🪔 माँ सरस्वती | विद्या-ज्ञान आरती

माँ सरस्वती जी की आरती

Maa Saraswati Aarti • 3 पावन पद

"जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता"

विद्या, बुद्धि, वाणी, संगीत एवं समस्त ललित कलाओं की अधिष्ठात्री माँ सरस्वती जी की पावन आरती।

2 दर्शन | 3 पद
1 टेक / ध्रुवपद

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ ॐ जय सरस्वती माता॥

Jaya Saraswatī Mātā, Maiyā Jaya Saraswatī Mātā. Sadguṇa vaibhava shālinī, tribhuvana vikhyātā.. Ōṁ Jaya Saraswatī Mātā..

सरल हिंदी भावार्थ:

हे माँ सरस्वती, आपकी जय हो! आप सद्गुणों और ज्ञान-वैभव से सुशोभित हैं और तीनों लोकों में विख्यात हैं।

English Meaning:

Glory to Mother Saraswati, the embodiment of wisdom, virtues, and renown throughout the three realms.

2 पद १ (श्वेत स्वरूप व वीणा)

चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मङ्गलकारी। सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥ बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला। शीश मुकुट मणिशोभित, गल मोतियन माला॥ विद्या दान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश करो। जग के सब अज्ञाना, जन-जन से हर लो॥ ॐ जय सरस्वती माता॥

Chandravadani padmāsini, dyuti maṅgalakārī. Sōhē shubha hansa savārī, atula tējasvārī.. Bāēṁ kara mēṁ vīṇā, dāēṁ kara mālā.. Ōṁ Jaya Saraswatī Mātā..

सरल हिंदी भावार्थ:

कमल पर विराजमान, हंसवाहिनी, एक हाथ में वीणा और दूसरे में ज्ञान-माला धारण करने वाली माता समस्त अज्ञान को हरकर ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं।

English Meaning:

Seated upon a lotus, riding the pristine swan with Veena and rosary, dispelling darkness with divine radiance.

3 पद २ (फलश्रुति)

धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो। ज्ञान-चक्षु दे माता, भव-सागर तारो॥ माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावै। हितकारी सुखकारी, ज्ञान-भक्ति पावै॥

Dhūpa dīpa phala mēvā, māṁ svīkāra karō. Māṁ Saraswatī kī āratī, jō kōī jana gāvai.. Hitakārī sukhakārī, jñāna-bhakti pāvai..

सरल हिंदी भावार्थ:

हे माँ, हमारी पूजा स्वीकार कर हमें विवेक रूपी दिव्य दृष्टि प्रदान करें। जो जन यह आरती गाते हैं, वे ज्ञान, भक्ति और परम सुख प्राप्त करते हैं।

English Meaning:

Accept our humble offerings and grant spiritual insight; whoever sings this Aarti attains wisdom, devotion, and supreme bliss.

आरती विधि एवं नियम

बसंत पंचमी अथवा नित्य प्रातःकाल श्वेत पुष्प, चन्दन एवं दीपक से पुस्तक व वीणा के समक्ष करें।

आरती के लाभ एवं फल

विद्या अध्ययन में एकाग्रता, परीक्षा में सफलता, वाणी में मधुरता, विवेक एवं कला-संगीत में निपुणता।