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🪔 मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम | रघुवर वंदना आरती

प्रभु श्री राम चन्द्र जी की आरती

Lord Rama Aarti • 3 पावन पद

"आरती कीजै श्री रघुवर जी की, सत चित आनंद रूप सुघर जी की"

मर्यादा पुरुषोत्तम, धर्म-धुरंधर, कौशल्यानंदन प्रभु श्री रामचन्द्र जी की पावन आरती।

1 दर्शन | 3 पद
1 टेक / ध्रुवपद

आरती कीजै श्री रघुवर जी की। सत चित आनन्द रूप सुघर जी की॥

Āratī kījai Shrī Raghuvara jī kī. Sata chita ānanda rūpa sughara jī kī..

सरल हिंदी भावार्थ:

सच्चिदानंद स्वरूप, मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री रामचन्द्र जी की पावन आरती करें।

English Meaning:

Perform the Aarti of Lord Rama, the perfect personification of Truth, Consciousness, and Bliss.

2 पद १ (सौंदर्य व आयुध)

सिर कनक मुकुट मनि द्युति छलता। मन्द हँसन लखि कोटि मदन मलता॥ गल मोतियन माल मनोहर सोहै। अरुन अधर लखि त्रिभुवन मोहै॥ कर धनुष बान तूणीर विराजे। संग जानकी लखन छवि साजे॥

Sira kanaka mukuṭa mani dyuti chhalatā. Manda hamsana lakhi kōṭi madana malatā.. Kara dhanuṣha bāna tūṇīra virājē.. Saṅga Jānakī Lakhana chhavi sājē..

सरल हिंदी भावार्थ:

जिनके मस्तक पर रत्नजड़ित स्वर्ण मुकुट है, मन्द मुस्कान करोड़ों कामदेवों को मोहित करती है। हाथों में धनुष-बाण लिए माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ सुशोभित हैं।

English Meaning:

Crowned in golden gems, radiating enchanting smile, holding bow and arrows alongside Mother Sita and Lakshmana.

3 पद २ (असुर निकंदन व फल)

खर दूषण रावन आदि संहारे। सुर मुनि जन के संकट टारे॥ केवट अरु शबरी पर कृपा किन्ही। विभीषण को लंकापति पद दीन्ही॥ जो यह आरती प्रेम सों गावै। परम धाम श्री राम पद पावै॥

Khara dūṣhaṇa rāvana ādi samhārē.. Kēvaṭa aru Shabarī para kr̥pā kinhī.. Jō yaha āratī prēma sōṁ gāvai.. Parama dhāma Shrī Rāma pada pāvai..

सरल हिंदी भावार्थ:

जिन्होंने रावण, कुम्भकर्ण आदि राक्षसों का संहार कर धर्म की स्थापना की, केवट व शबरी पर अपार कृपा की। यह आरती प्रेम से गाने वाले प्रभु का परम धाम पाते हैं।

English Meaning:

Slayer of Ravana, redeemer of Shabari and Guha; whoever sings this Aarti with devotion attains the supreme abode of Rama.

आरती विधि एवं नियम

रामनवमी, दीपावली अथवा नित्य रामायण पाठ के उपरांत कपूर आरती व पुष्प अर्पित करें।

आरती के लाभ एवं फल

समस्त पापों का नाश, पारिवारिक मर्यादा व प्रेम, धर्म की रक्षा, मानसिक शांति एवं भवसागर से मुक्ति।