Popular:
धनपति कुबेर देव

श्री कुबेर चालीसा

Shree Kuber Chalisa • रचयिता: पारंपरिक स्तुति

समस्त यक्षों और देवों के कोषाध्यक्ष धनपति कुबेर देव की कल्याणकारी चालीसा, जो आर्थिक तंगी दूर कर स्थायी धन-वैभव और सुख-शांति प्रदान करती है।

दरिद्रता और ऋण मुक्ति, व्यापार में वृद्धि, अचल संपत्ति और आर्थिक उन्नति की प्राप्ति होती है।
3 दोहे
40 चौपाइयाँ
दोहा प्रारंभिक दोहा 1

जैसे अटल हिमालय और जैसे अडिग सुमेर। ऐसे ही स्वर्ग द्वार पै, अविचल खड़े कुबेर॥

दोहा प्रारंभिक दोहा 2

विघ्न हरण मंगल करण, सुनो शरणागत की टेर। भक्त हेतु प्रभु आप ही, पूर्ण करहु सब घेर॥

चौपाई चौपाई 1

जै जै जै श्री कुबेर भण्डारी। धन माया के तुम अधिकारी॥

चौपाई चौपाई 2

तप तेज पुंज निर्भय भय हारी। पवन वेग सम तनु बलधारी॥

चौपाई चौपाई 3

स्वर्ग द्वार पै रहत पहारा। सेवक सब जन आज्ञाकारा॥

चौपाई चौपाई 4

शिव के परम भक्त कहलाए। अलकापुरी के अधिपति पाए॥

चौपाई चौपाई 5

एक समय शिव दर्शन कीन्हा। मन में भक्ति भाव अति लीन्हा॥

चौपाई चौपाई 6

तप कीन्हो प्रभु मन चित लाई। शिव प्रसन्न हो दर्शन पाई॥

चौपाई चौपाई 7

वर माँगा प्रभु भक्ति तुम्हारी। दीन दयाल सुनो त्रिपुरारी॥

चौपाई चौपाई 8

शिव प्रसन्न वर दीन्हो भारी। धन के बनो तुम पहरेदारी॥

चौपाई चौपाई 9

यक्षराज तुम पदवी पावो। सकल लोक में पूजे जावो॥

चौपाई चौपाई 10

नव निधि अष्ट सिद्धि के स्वामी। जयति जयति प्रभु अंतरयामी॥

चौपाई चौपाई 11

शंख पद्म मकर अरु कच्छा। मुकुंद कुंद नील महा रच्छा॥

चौपाई चौपाई 12

सब निधि प्रभु के वश में होई। जो ध्यावे निर्धन नहिं कोई॥

चौपाई चौपाई 13

दीन दुखी जब शरण में आवै। धन वैभव सो सहजहि पावै॥

चौपाई चौपाई 14

ऋण संकट सब दूर नसावै। सुख सम्पति घर में लहरावै॥

चौपाई चौपाई 15

व्यापार में नित लाभ करावो। विघ्न बाधा सब दूर भगावो॥

चौपाई चौपाई 16

जो जन नियम से पाठ कराही। ता घर लक्ष्मी सदा समाही॥

चौपाई चौपाई 17

दीपक जला धूप ध्यावै। कुबेर चालीसा प्रेम से गावै॥

चौपाई चौपाई 18

कनक रत्न बहु पावे सोई। जापर कृपा कुबेर की होई॥

चौपाई चौपाई 19

दरिद्रता का नाश करावे। यश वैभव चारों दिशि छावै॥

चौपाई चौपाई 20

हे कुबेर प्रभु विनय हमारी। सुनो विनती तुम संकट हारी॥

चौपाई चौपाई 21

हाथ जोड़ि प्रभु शीश नवाऊं। निशिदिन प्रभु तव गुण मैं गाऊं॥

चौपाई चौपाई 22

कृपा दृष्टि हम पर भी कीजै। धन-धान्य का वर प्रभु दीजै॥

चौपाई चौपाई 23

अन्न-वस्त्र की कमी न होई। सुखी रहे सब जग में कोई॥

चौपाई चौपाई 24

भूत-पिशाच निकट नहिं आवैं। तुम्हरे डर से सब थर्रावैं॥

चौपाई चौपाई 25

सकल मनोरथ पूर्ण कीजै। भक्ति भाव निज उर में दीजै॥

चौपाई चौपाई 26

जय कुबेर जय जय धन दाता। तुम ही सब जग के सुख त्राता॥

चौपाई चौपाई 27

दीन दयाल दया निधि प्यारे। हम हैं प्रभु तव शरण सहारे॥

चौपाई चौपाई 28

पाप ताप सब दूर बहाओ। जीवन में आनंद बढ़ाओ॥

चौपाई चौपाई 29

धर्म अर्थ काम मोक्ष पावै। जो कुबेर को शीश नवावै॥

चौपाई चौपाई 30

अलकापुरी के राजा प्यारे। देव सकल जयकार उचारे॥

चौपाई चौपाई 31

पुष्पक वाहन अति मनहारी। शोभा बरणी न जाए तुम्हारी॥

चौपाई चौपाई 32

गदा चक्र कर सोहत भारी। जयति जयति यक्षेश्वर भण्डारी॥

चौपाई चौपाई 33

मंगल मूर्ति रूप सुहावन। करहु भक्त का जीवन पावन॥

चौपाई चौपाई 34

सदा सहाय रहहु मम काजा। जय जय जय कुबेर यक्षराजा॥

चौपाई चौपाई 35

जो चालीसा पाठ करेगा। भव सागर से सहज तरेगा॥

चौपाई चौपाई 36

पुत्र पौत्र धन धान्य बढ़ावे। सुख सम्पति जग में फैलावै॥

चौपाई चौपाई 37

निश्चय प्रेम प्रतीति लगाई। कुबेर चालीसा जो जन गाई॥

चौपाई चौपाई 38

ताके सब संकट मिटि जाई। कुबेर देव की कृपा समाई॥

चौपाई चौपाई 39

बार बार प्रभु विनय सुनाऊं। चरण शरण में शीश नवाऊं॥

चौपाई चौपाई 40

कुबेर कृपा सब पर बनी रहे। जन-जन मंगल गान कहे॥

दोहा समापन दोहा

धन धान्य से पूर्ण हो, सुख सम्पति मिल जाए। कुबेर कृपा जिस पर रहे, संकट दूर पलाए॥