Popular:
माँ संतोषी

श्री संतोषी माता चालीसा

Shree Santoshi Mata Chalisa • रचयिता: पारंपरिक स्तुति

भगवान गणेश की मानस पुत्री और समस्त मनोकामनाएं पूर्ण कर संतोष, सुख व शांति प्रदान करने वाली माँ संतोषी की परम कल्याणकारी चालीसा।

मनोकामना पूर्ति, शुक्रवार व्रत फल, पारिवारिक सुख-शांति, कलह निवारण और जीवन में असीम संतोष व समृद्धि की प्राप्ति होती है।
3 दोहे
40 चौपाइयाँ
दोहा प्रारंभिक दोहा 1

बन्दौं सन्तोषी चरण रिद्धि-सिद्धि दातार। ध्यान धरत ही होत नर दुःख सागर से पार॥

दोहा प्रारंभिक दोहा 2

भक्तन को सन्तोष दे सन्तोषी तव नाम। कृपा करहु जगदम्ब अब आया तेरे धाम॥

चौपाई चौपाई 1

जय सन्तोषी मात अनूपा। अद्भुत शक्ति अलौकिक रूपा॥

चौपाई चौपाई 2

गणपति की सुपुत्री सुखदानी। रिद्धि-सिद्धि की तुम हो खानी॥

चौपाई चौपाई 3

चार भुजा अति सुंदर सोहैं। देखि स्वरूप सकल जग मोहैं॥

चौपाई चौपाई 4

खड्ग त्रिशूल एक कर धारा। अक्षमाल चामर मनहारा॥

चौपाई चौपाई 5

स्वर्ण मुकुट शीश पर छाजै। दिव्य कांति तन अतिशय राजै॥

चौपाई चौपाई 6

रक्त वस्त्र अति सुंदर सोहैं। भक्तन के संकट सब खोहैं॥

चौपाई चौपाई 7

शुक्रवार को जो व्रत कीन्हा। माँ ने ताको सब सुख दीन्हा॥

चौपाई चौपाई 8

गुड़ चने का भोग लगावै। खटाई कबहूँ निकट न लावै॥

चौपाई चौपाई 9

कथा प्रेम सों जो नर गावै। सन्तोषी माँ कृपा बरसावै॥

चौपाई चौपाई 10

निर्धन को धनवान बनावती। बाँझिन को सुत गोद खिलावती॥

चौपाई चौपाई 11

रोगी के सब रोग नशावती। अंधन को तुम नैन दिखावती॥

चौपाई चौपाई 12

कन्या पावे वर मनभावन। घर आँगन हो परम सुहावन॥

चौपाई चौपाई 13

व्यापार में नित लाभ करावो। संकट विपदा दूर भगावो॥

चौपाई चौपाई 14

जापर कृपा तुम्हारी होई। ताको दुख नहिं व्यापै कोई॥

चौपाई चौपाई 15

संतोषी माँ जन सुख दाता। तुम त्रिभुवन की मंगल त्राता॥

चौपाई चौपाई 16

दीन हीन पर दया दिखाओ। अपने दासन को अपनाओ॥

चौपाई चौपाई 17

हाथ जोड़ि जो स्तुति गावै। मनवांछित फल सोई पावै॥

चौपाई चौपाई 18

धूप दीप नैवेद्य संवारे। सन्तोषी माँ कष्ट निवारे॥

चौपाई चौपाई 19

नित प्रति जो चालीसा गावे। ताके गृह आनंद बरसावे॥

चौपाई चौपाई 20

पारिवारिक क्लेश मिटि जाई। सुख सम्पति घर माहिं समाई॥

चौपाई चौपाई 21

हे जगजननी मात भवानी। सकल लोक में महिमा जानी॥

चौपाई चौपाई 22

चारहुं वेद महिमा बतलाएं। सुर मुनि सब पद शीश नवाएं॥

चौपाई चौपाई 23

ब्रह्मा विष्णु महेश मनावे। चरण कमल में ध्यान लगावे॥

चौपाई चौपाई 24

पाप ताप सब दूर बहाओ। जीवन सुखमय शांत बनाओ॥

चौपाई चौपाई 25

विद्या बुद्धि विवेक बढ़ाओ। कुमति निवारि सुमति प्रकटाओ॥

चौपाई चौपाई 26

शत्रु दमन अरु संकट टारो। निज सेवक को शीघ्र उबारो॥

चौपाई चौपाई 27

भूत प्रेत बाधा सब नाशो। हृदय कमल में प्रेम प्रकासो॥

चौपाई चौपाई 28

सदा सहाय रहहु मम माई। जय सन्तोषी माता जाई॥

चौपाई चौपाई 29

चरण शरण में जो नर आवै। सो नर परम आनंद पावै॥

चौपाई चौपाई 30

कृपा दृष्टि हम पर भी कीजै। भक्ति भाव निज उर में दीजै॥

चौपाई चौपाई 31

जयति जयति जगपति सुखकारी। हरहु सकल बाधा संसारी॥

चौपाई चौपाई 32

चालीसा जो पढ़े प्रेम से। छूटे भव बंधन के नेम से॥

चौपाई चौपाई 33

अष्ट सिद्धि नवनिधि की दाता। जय सन्तोषी जग विख्याता॥

चौपाई चौपाई 34

सकल मनोरथ पूरण कीजै। अभय वरद दासन को दीजै॥

चौपाई चौपाई 35

नमो नमो हे मंगल करनी। नमो नमो दुख दारिद्र हरनी॥

चौपाई चौपाई 36

बार बार पद शीश नवाऊं। माँ का निर्मल गुणगान सुनाऊं॥

चौपाई चौपाई 37

निश्चय प्रेम प्रतीति लगाई। सन्तोषी माता सदा सहाई॥

चौपाई चौपाई 38

ताके सब संकट मिटि जाई। माँ सन्तोषी कृपा समाई॥

चौपाई चौपाई 39

जय जय जय सन्तोषी माई। भक्तन के संकट सब खाई॥

चौपाई चौपाई 40

संतोषी माँ की जय जयकारा। गूंजे त्रिभुवन सकल संसारा॥

दोहा समापन दोहा

संतोषी माँ की कृपा, पावै जो नर ध्याय। सकल मनोरथ पूर्ण हों, दुख दरिद्र मिटि जाय॥