Answer on: हिंदू धर्म में इतने देवी-देवता क्यों हैं?
वृहदारण्यक उपनिषद् में याज्ञवल्क्य-शाकल्य संवाद में अंततः 33 से घटकर केवल 'एक ब्रह्म' पर ही प्रतिष्ठा होती है। अनेकता में एकता ही सनातन का प्राण है।
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Retired Professor of Sanskrit Literature, Almora, Uttarakhand
उत्तराखंड की देवभूमि से। 35+ वर्ष संस्कृत एवं दर्शन का अध्यापन। सरल भाषा में शास्त्रों का सार साझा करना मेरा उद्देश्य।
वृहदारण्यक उपनिषद् में याज्ञवल्क्य-शाकल्य संवाद में अंततः 33 से घटकर केवल 'एक ब्रह्म' पर ही प्रतिष्ठा होती है। अनेकता में एकता ही सनातन का प्राण है।
छांदोग्य और मांडूक्य दोनों में ॐकार की त्रिमात्रा (अ, उ, म) को क्रमशः जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति और जो मात्रा-रहित अखंड नाद है, उसे तुरीय कहा गया है। यह अद्वैत का सर्वोच्च शिखर है।
श्रीमद्भगवद्गीता (१२.५) में स्पष्ट है: 'क्लेशोऽधिकतरस्तेषामव्यक्तासक्तचेतसाम्' — अव्यक्त (निराकार) में मन लगाना देहधारियों के लिए अत्यंत कठिन है। साकार उपासना मन को सहज ही परमात्मा से जोड़ देती है।
Historically, India's shift towards widespread lacto-vegetarianism was an ethical evolution driven by the Upanishads, Jainism, Buddhism, and Vaishnavism, emphasizing that one cannot attain inner peace while inflicting terror on fellow sentient creatures.
विद्वान मित्रों, शंकराचार्य जी के प्रसिद्ध कथन *"ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः"* को लेकर अक्सर यह भ्रम फैलता है कि यदि जगत् मिथ्या है, तो क्या हमें अपने सांसारिक कर्तव्यों, समाज और नीति-नियमों को त्याग देना चाहिए? 'मिथ्या' और 'असत्य' (जैसे वंध्या-पुत्र या आकाश-कुसुम) में क्या तात्विक भेद है? कृपया स्पष्ट करें।
राघवेंद्र जी, पुरातात्विक (Archaeological), समुद्री (Marine Archaeology) और खगोलीय (Astronomical) तीनों स्तरों पर महाभारत के ऐतिहासिक होने के सशक्त प्रमाण हैं: १. समुद्र में जलमग्न द्वारका (ASI Undersea Excavations): महान पुरातत्ववेत्ता डॉ. एस. आर. राव (Dr. S. R. Rao) के नेतृत्व में Archaeological Survey of India (ASI) ने गुजरात के बेट द्वारका तट पर समुद्र के भीतर किले की प्राचीरें, 500+ मीटर लंबी दीवारें, लंगर (Stone Anchors) और मोहरें खोजीं, जो महाभारत कालीन विवरणों से हूबहू मेल खाती हैं। २. खगोलीय स्थितियां (Astronomical Software Dating): महर्षि वेदव्यास ने महाभारत में ग्रहों, नक्षत्रों और ग्रहणों की सटीक 140+ खगोलीय स्थितियां दर्ज की हैं (जैसे युद्ध के आरंभ में शनि का रोहिणी में होना, चंद्र-सूर्य ग्रहण की त्रयोदशी युति)। आधुनिक प्लेनेटेरियम सॉफ्टवेयर (Planetarium Gold / Stellarium) से जब इन ग्रहों की गणना की गई, तो यह सटीक रूप से लगभग 3100 ईसा पूर्व (BCE) की तिथि दर्शाती है। ३. पीजीडब्ल्यू (Painted Grey Ware) संस्कृति: प्रो. बी. बी. लाल द्वारा हस्तिनापुर, कुरुक्षेत्र, अहिच्छत्र, तिलपत (तिलप्रस्थ), इंद्रप्रस्थ और बरनावा (वारणावत) में की गई खुदाई में एक ही कालखंड की सभ्यता की परतें मिली हैं। अतः महाभारत कोई काल्पनिक उपन्यास नहीं, बल्कि भारत का वास्तविक, गौरवशाली और प्रामाणिक इतिहास है।
आधुनिक भौतिक विज्ञान (Quantum Physics) के अनुसार भी सारा ब्रह्मांड Energy (काली) और Underlying Vacuum/Field (शिव) का खेल है। शिव के बिना काली अनियंत्रित ऊर्जा हैं और काली के बिना शिव निष्क्रिय आधार हैं। दोनों की एकात्मता ही सृष्टि और मुक्ति का मूल है।
A very common debate across social media, YouTube, and podcasts revolves around whether ancient India possessed advanced aeronautical technology. Books like the Vaimanika Shastra are frequently cited, alongside descriptions of Pushpaka Vimana in the Ramayana. From a serious historical, Sanskrit philological, and scientific perspective, what is the reality? How do mainstream scholars and Sanskrit researchers view these texts?