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ईशावास्योपनिषद् (ईशोपनिषद्) • अध्याय 1 • मन्त्र 7
Ishavasya Upanishad (Isha) 1.7
Mantra: 1.7
[Ishopanishad_1.7]
यस्मिन्सर्वाणि भूतान्यात्मैवाभूद्विजानतः । तत्र को मोहः कः शोक एकत्वमनुपश्यतः ॥ ७॥
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
विशेष ज्ञान सम्पन्न योगी की दृष्टि में जब सम्पूर्ण चराचर जगत् परमात्मा ही हो जाता है उस अवस्था में परमात्मा के एकत्व को देखने वाले उस योगी के लिये मोह और शोक कहां। अर्थात् मोह और शोक के स्थान तो भौतिक पदार्थ हैं जब उनसे सम्बन्ध त्याग कर मुमुक्ष केवल एक ब्रह्म को ही सर्वत्र देखता है। तब उसे मोह शोकादि नहीं सताते । ॥७॥
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