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भगवान विष्णु (जगतपालक) बीज मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

भगवान विष्णु मंत्र संग्रह

Lord Vishnu Mantra Sangrah • वैदिक एवं पौराणिक सिद्ध मंत्र

सृष्टि के पालनकर्ता, क्षीरसागर शयन करने वाले चतुर्भुज भगवान श्री हरि विष्णु के पावन मंत्र, जो जीवन में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थ प्रदान करते हैं।

📿 जप विधि व नियम: तुलसी माला से पीले वस्त्र धारण कर, पूर्व दिशा की ओर मुख करके 108 बार नित्य जप करें।
✨ मंत्र फल व लाभ: पारिवारिक सुख-शांति, दरिद्रता का नाश, पाप मुक्ति, पितृ तृप्ति और अंत समय में परम पद (वैकुंठ) की प्राप्ति।
4 सिद्ध मंत्र
108 जप संख्या
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समस्त 4 सिद्ध मंत्र श्लोक
#1 विष्णु द्वादशाक्षर महामंत्र (Vishnu Dwadashakshar Mantra)

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

Om Namo Bhagavate Vasudevaya॥

भावार्थ (Meaning): समस्त ब्रह्मांड में सर्वव्यापी और परब्रह्म स्वरूप भगवान वासुदेव को मेरा बारंबार नमस्कार है।
English: Salutations to the Supreme Lord Vasudeva, the all-pervading omnipresent divinity.
📿 अनुशंसित जप: 108 बार प्रामाणिक वैदिक पाठ
#2 शान्ताकारं भुजगशयनं श्लोक (Shantakaram Bhujagashayanam)

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

Shantakaram Bhujagashayanam Padmanabham Suresham Vishvadharam Gaganasadrisham Meghavarnam Shubhangam। Lakshmikantam Kamalanayanam Yogibhirdhyanagamyam Vande Vishnum Bhavabhayaharam Sarvalokaikanatham॥

भावार्थ (Meaning): जिनकी आकृति शांत है, जो शेषनाग की शय्या पर शयन करते हैं, जिनकी नाभि में कमल है, जो देवताओं के स्वामी और संपूर्ण जगत के आधार हैं, जो आकाश के समान सर्वव्यापी, मेघ के समान वर्ण वाले, सुंदर अंगों वाले, लक्ष्मी के पति, कमल नेत्र वाले और योगियों द्वारा ध्यान में जानने योग्य हैं; उन समस्त लोकों के एकमात्र स्वामी और संसार के भय को हरने वाले भगवान विष्णु की मैं वंदना करता हूँ।
English: I adore Lord Vishnu, the serene one resting on the serpent, from whose navel springs the lotus, ruler of gods, foundation of the universe, boundless as the sky, cloud-complexioned, beloved of Lakshmi, lotus-eyed, realized by yogis in meditation, who dispels the fear of worldly existence.
📿 अनुशंसित जप: 21 बार प्रामाणिक वैदिक पाठ
#3 विष्णु गायत्री मंत्र (Vishnu Gayatri Mantra)

ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

Om Narayanaya Vidmahe Vasudevaya Dhimahi। Tanno Vishnuh Prachodayat॥

भावार्थ (Meaning): हम नारायण को जानते हैं और वासुदेव का ध्यान करते हैं। वे भगवान विष्णु हमें धर्म और ज्ञान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें।
English: We meditate upon Narayana and contemplate upon Vasudeva. May Lord Vishnu awaken and guide our intellect.
📿 अनुशंसित जप: 108 बार प्रामाणिक वैदिक पाठ
#4 मंगलम भगवान विष्णुः श्लोक (Mangalam Bhagavan Vishnuh)

मङ्गलं भगवान् विष्णुर्मङ्गलं गरुडध्वजः। मङ्गलं पुण्डरीकाक्षो मङ्गलाय तनो हरिः॥

Mangalam Bhagavan Vishnur Mangalam Garudadhwajah। Mangalam Pundarikaksho Mangalaya Tano Harih॥

भावार्थ (Meaning): भगवान विष्णु मंगल स्वरूप हैं, गरुड़ध्वज मंगल स्वरूप हैं, कमल नयन भगवान मंगल स्वरूप हैं; वे श्री हरि हमारे समस्त कार्यों को मंगलकारी बनाएं।
English: Auspicious is Lord Vishnu, auspicious is the one with the Garuda flag, auspicious is the lotus-eyed Lord; may Sri Hari bestow auspiciousness upon us.
📿 अनुशंसित जप: 21 बार प्रामाणिक वैदिक पाठ