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वेदमाता गायत्री (सविता देव) बीज मंत्र: ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥

गायत्री महामंत्र संग्रह

Gayatri Mahamantra Sangrah • वैदिक एवं पौराणिक सिद्ध मंत्र

वेदों की जननी, संपूर्ण सनातन धर्म का परम तेजस्वी महामंत्र। सूर्य सविता देव के दिव्य प्रकाश का ध्यान करते हुए सद्बुद्धि एवं आत्मज्ञान की प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ साधन।

📿 जप विधि व नियम: त्रिकाल संध्या (प्रातः, मध्याह्न, सायं) में पूर्व दिशा की ओर मुख करके रुद्राक्ष या तुलसी माला से कम से कम 108 बार जप करें।
✨ मंत्र फल व लाभ: बुद्धि का तीक्ष्ण विकास, एकाग्रता, आत्मिक ओज, सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक विकारों का नाश और ब्रह्मतेज की प्राप्ति।
2 सिद्ध मंत्र
108 जप संख्या
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समस्त 2 सिद्ध मंत्र श्लोक
#1 ऋग्वेदीय गायत्री महामंत्र (The Supreme Gayatri Mantra)

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥

Om Bhur Bhuvah Svaha Tat Savitur Varenyam Bhargo Devasya Dhimahi। Dhiyo Yo Nah Prachodayat॥

भावार्थ (Meaning): उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अपनी अंतरात्मा में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करे।
English: We meditate upon the supreme, adorable divine light of the Sun, the creator of the physical, subtle, and celestial realms. May that divine light inspire and illuminate our intellect.
📿 अनुशंसित जप: 108 बार प्रामाणिक वैदिक पाठ
#2 गायत्री ध्यान श्लोक (Gayatri Dhyana Shloka)

मुक्ताविद्रुमहेमनीलधवलच्छायैर्मुखैस्त्रीक्षणै- र्युक्तामिन्दुनिबद्धरत्नमुकुटां तत्त्वार्थवर्णात्मिकाम्। गायत्रीं वरदाभयाङ्कुशकशाः शुभ्रं कपालं गदां शंखं चक्रमथारविन्दयुगलं हस्तैर्वहन्तीं भजे॥

Mukta Vidruma Hema Nila Dhavala Chhayair Mukhais Tryakshanair Yuktam Indu Nibaddha Ratna Mukutam Tattvartha Varnatmikam। Gayatrim Varadabhayankusha Kashah Shubhran Kapalam Gadam Shankham Chakram Atharavinda Yugalam Hastair Vahantim Bhaje॥

भावार्थ (Meaning): मोती, मूंगा, स्वर्ण, नीलम और धवल कांति वाले पांच मुखों से युक्त, तीन नेत्रों वाली, चंद्रमा से सुशोभित मुकुट धारण करने वाली और हाथों में शंख, चक्र, गदा, पद्म आदि आयुध धारण करने वाली माँ गायत्री का मैं ध्यान करता हूँ।
English: I worship Mother Gayatri endowed with five faces shining like pearl, coral, gold, sapphire, and white crystal, crowned with the moon, and holding divine emblems of grace and protection.
📿 अनुशंसित जप: 21 बार प्रामाणिक वैदिक पाठ